■ मैं पथ हूँ ■
(गीत)
मैं पथ हूँ; पथिक प्यारे
किसी को मैं न रुकाता हूँ
जी-जान से जो चलने वाले
सिर उनके न झुकाता हूँ।
मैं पथ हूँ...
चलते रहो पथिक तुम
मंजिल तेरी कुछ आगे है
रुकने का तू नाम न ले
डरकर तू क्यों भागे है
डगमग पग हो चाहे जितने
कभी उन्हें न गिराता हूँ।
मैं पथ हूँ...
आशा के हिलोर भर तू
वक्त को भी पहचान ले
अंत उसका कभी न होता
खुद ही को जो पहचान ले
खुलता रहूँगा उनके खातिर
किसी को किनारे न कराता हूँ
मैं पथ हूँ....
अब तेरे हाथ है तेरी मंजिल
तू ही उसको पाएगा
करना मत बदनाम मुझको
वरना हर बार पछताएगा
तू ही तेरे जाल में फँसेगा
मैं खुद काँटे न बिछाता हूँ।
मैं पथ हूँ...
-०-
4 अक्तूबर 2026 शाम 4:30
रचनाकार
● मच्छिंद्र बापू भिसे 'मंजीत'● ©®
सातारा (महाराष्ट्र)
सेवार्थ निवास : शिक्षण सेवक, जिला परिषद हिंदी वरिष्ठ प्राथमिक पाठशाला, विचारपुर, जिला गोंदिया (महाराष्ट्र)
9730491952

