
■ एकता-ए-हिंदुस्थानी ■
(कविता)
भारत हमारी आन है,
भारत हमारी शान है
इसकी गरिमा के लिए,
हमारी सौ जान कुर्बान है!
सभ्यता और संस्कार ही,
हमारे देश की पहचान है, ।
अलग-थलग रहते सदा,
दिल में बसता हिंदुस्थान है ।
कितने धर्म, कितनी जातियाँ,
और कितनी भाषाओं का गान है।
समता, बंधुता, एकता में बँधा,
करता सबका समान सम्मान है!
रोम-रोम कहे रहीम, रग-रग कहे राम
कोई पढ़े गीता, तो कोई पढ़े कुरान,
कश्मीर की लो या केरल की माटी,
कान लगाकर सुन लो भाई
कहती – इसमें बसता जहान है!
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11 जनवरी 2023
रचनाकार
● मच्छिंद्र बापू भिसे 'मंजीत'● ©®
सातारा (महाराष्ट्र)
सेवार्थ निवास : शिक्षण सेवक, जिला परिषद हिंदी वरिष्ठ प्राथमिक पाठशाला, विचारपुर, जिला गोंदिया (महाराष्ट्र)
9730491952

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