मच्छिंद्र बापू भिसे 9730491952 / 9545840063

'छात्र मेरे ईश्वर, ज्ञान मेरी पुष्पमाला, अर्पण हो छात्र के अंतरमन में, यही हो जीवन का खेल निराला'- मच्छिंद्र बापू भिसे,भिरडाचीवाडी, पो. भुईंज, तहसील वाई, जिला सातारा ४१५५१५ : 9730491952 : 9545840063 - "आपका सहृदय स्वागत हैं।"
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■ छपक-छपाक ■ (बालगीत) - मच्छिंद्र बापू भिसे 'मंजीत

■ छपक-छपाक ■
(बालगीत)
रिमझिम बारिश आती है,
आँगन हमारा भिगोती है।

कीचड़ मुझको भाता है,
कपड़ों को ही रँगाता है।

छपक-छपाक कूद जाती हूँ,
कीचड़-पानी सब उड़ाती हूँ।

संगी सब जब आती हैं,
बूँदों जी भर भीगोती हैं।

बारीश तभी तू आना जी,
जब मम्मी घर न होती है।

जी करता और खेलूँ-कुदूँ,
मम्मी जोर-जोर से चिल्लाती है।
-०-
19 मई 2025 सुबह: 08:33 बजे
रचनाकार
● मच्छिंद्र बापू भिसे 'मंजीत'● ©®
सातारा (महाराष्ट्र)
सेवार्थ निवास : शिक्षण सेवक, जिला परिषद हिंदी वरिष्ठ प्राथमिक पाठशाला, विचारपुर, जिला गोंदिया (महाराष्ट्र)
9730491952
-०-


सबसे सुंदर मेरा वतन (बालकविता) - मच्छिंद्र बापू भिसे 'मंजीत'

  

सबसे सुंदर मेरा वतन 
(बालकविता)
अपनी धरती की माटी पर
चलते जाते शान से,
सबसे सुंदर मेरा वतन
प्यारा दिलों-जान से।

नदियाँ बहती गीत है गाती
सुधा बहाती मान से,
लहरें खेती मन को भाती
इतराती अभिमान से।

हिमालय के आँगन में गूँजे
गीत गीता-कुरान से,
धर्म देश है जाति मानव
बंधुता पलती इक प्राण से।

मीठा खाते पर्व मनाते 
रंगते होली गुलाल से,
ईद मनाते दीप जलाते
सद्भावना सम्मान से।

कितनी सुंदर मधुर बोलियाँ
राष्ट्रगीत गाए एक तान से,
रहे तिरंगा ऊँचा जगत में
बोलो वंदे मातरम् जी-जान से।
-0-
मच्छिंद्र बापू भिसे 'मंजीत' ©®
(अध्यापक-कवि-संपादक)
सातारा (महाराष्ट्र) पिन- 415 515
मोबाइल: 9730491952
ईमेल: machhindra.3585@gmail.com
-०-
09 अगस्त 2021
पूर्व रात्रि 1.10

●एक प्यारी तितली● (बाल गीत) - मच्छिंद्र भिसे



●एक प्यारी तितली●
(बाल गीत)
एक प्यारी तितली उड़ी चली
खुशियाँ बहार देती चली
न जाने कहाँ उड़ी चली
इस कली या उस गली
एक प्यारी तितली उड़ी चली।

बगियन में हैं फूल हजार
इंद्रधनुष्य-सी बिछी बहार
सखियों संग करें बातें चार
भँवरों की भी लगी है कतार
न जाने क्या वहाँ फँसी चली
एक प्यारी तितली उड़ी चली।

तितली हमारी है नादान
भँवरे भी करते परेशान
सुंदरता की वह है खान
काँटों में ना अटके जान
लौट आ जाए अपनी गली
एक प्यारी तितली उड़ी चली।

बिन तितली के आँगन सूना
ना कोई अनहोनी हो ना,
तितली के बिन आए न चैना
बाँट जोहते मेरे नयना
न जाने कहाँ  रुकी भली
एक प्यारी तितली उड़ी चली।
-०-
15 दिसंबर 2019
● मच्छिंद्र भिसे ©®
(अध्यापक-कवि-संपादक)
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सातारा (महाराष्ट्र) पिन- 415 515
मोबाइल: 9730491952
ईमेल: machhindra.3585@gmail.com

●उपरोक्त रचना मौलिक, अप्रकाशित है●

■ आज़ादी वैचारिक बंधनों से ■ (आलेख) - मच्छिंद्र बापू भिसे 'मंजीत'

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