■ दीया जले ■
(गजल)
खुशियों से भरा दीया, आप दिल में भी जले;
आपनों का प्यारा दीया, आप दिल में भी जले।
जनम पाया जिनसे हमने, और बुने हम;
उनके स्मरण-सेवी दीया, आप दिल में भी जले।
ज्ञानवान गुणवान बने हम, और बने संज्ञानी;
गुरु छाँह अनुरागी दीया, आप दिल में भी जले।
साथ-संगी से बचपन खिला, मन भौंर बना;
खेल-खिलवाडी दीया, आप दिल में भी जले।
पथ के हारे दुख से हमको, सुख मिला पावन;
वक्त-आँधी का दीया, आप दिल में भी जले।
राह चलते राही मिलें, सुख-दुख के संग बने;
उनके अभावों का दीया, आप दिल में भी जले।
'मंजीते' खुद भला बने, खुद ही से प्यार करें;
आत्म-प्यार का दीया, आप दिल में भी जले।
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07 नवंबर 2026 शाम 8:49 बजे
रचनाकार
● मच्छिंद्र बापू भिसे 'मंजीत'● ©®
सातारा (महाराष्ट्र)
सेवार्थ निवास : शिक्षण सेवक, जिला परिषद हिंदी वरिष्ठ प्राथमिक पाठशाला, विचारपुर, जिला गोंदिया (महाराष्ट्र)
9730491952

