मच्छिंद्र बापू भिसे 9730491952 / 9545840063

'छात्र मेरे ईश्वर, ज्ञान मेरी पुष्पमाला, अर्पण हो छात्र के अंतरमन में, यही हो जीवन का खेल निराला'- मच्छिंद्र बापू भिसे,भिरडाचीवाडी, पो. भुईंज, तहसील वाई, जिला सातारा ४१५५१५ : 9730491952 : 9545840063 - "आपका सहृदय स्वागत हैं।"

श्रद्धासुमन अर्पण : बलिदानी वीर-सपूत

💐😔💐श्रद्धासुमन अर्पण💐😔💐
            पुलवामा में घटी घटना ने हर एक भारतीय दिल को दहला दिया है. पूरा भारतवर्ष शहीदों के यकायक अवसान से आहत हैं. भारतीय सेना ने हमेशा शांति और शौर्य की  कहानियाँ लिखीं है. पुलवामा में आतंकवादीयों के नापाक इरादों की वजह से अपने जवानों की जानें गईं. हम उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं. हम प्रार्थना करते है कि शहीदों के परिजनों को ईश्वर इस आघात से उभरने हेतू हौसला प्रदान करें.
            हर भारतीय को अपने वीर सपूतों पर गर्व है. एक बलिदान पर सौ-सौ नए वीर तैयार करने की प्रेरणा देनेवाले वीर इस भूमि पर न्योछावर हुए हैं. हम उन्हें सलाम करते हैं. भारत भू का हर सपूत पुन: पुन: समर्पित होने के लिए लालायित हैं. यही शहीदों के मनोभाव एवं मातृभूमि के प्रति प्रेम दर्शानेवाली एक रचना उनके प्रति श्रद्धा एवं कृतज्ञता हेतू प्रस्तुत है.

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बलिदानी वीर-सपूत
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हे मातृभूमि माफ करना एक बार हमें,
जब आएँगे वापस समा लेना अपने जहान में.

चल पड़े थे हम शीश चढ़ाने तुमपर ऐ वतन,
शहीदी मिलीं बिना किए तुमपर कुछ अर्पण,
पर कभी सोचा न था, हमने अपने जहन में,
खाली हाथ लौटूँगा माँ, तिरंगे के कफन में.

बचपन में बुनाया था एक ही सपना,
वतन की सेवा ही करना फर्ज हो अपना,
पर कभी चाहा न था, बहे गंध वो पवन में,
जिसमें सुगंध न हो, शहादती खून वतन में.

मात-पिता के आशिष वचन हो गए सफल,
सीने पे वर्दी दिल में गुँजी रक्षा की पहल,
पर कभी माँगी न थी, शौर्य की गुँज आसमान मेें,
जहाँ सीने में न हो, गोलियों की बाग बहार में.

दुवाएँ कबूल हुईं देशवासियों सभी तुम्हारी,
मिली खाली में हाथ दुआओं में जन्नत सारी,
पर कभी खुशी न मिलेगी, सिवाए वतन प्यार में,
जहाँ खुशियाँ लिखी गईं हैं, गंगा-सिंधु की धार में.

दुआ माँगते हम यमराज से भेज दो वापस वहीं
जहाँ सूरमा खड़े हैं, शीश चढ़ाने वतन पे कहीं,
शांति न मिलेगी हमें, खाली हाथ आए स्वर्ग में,
चाहते हैं गहरी नींद, लड़ते-लड़ते वतन की गोद में.
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✒रचनाकार✒
मच्छिंद्र भिसे,
अध्यापक,
ग्राम भिरडाचीवाडी,
डाक भुईंज, तहसील वाई,
जिला सातारा ४१५ ५१५ (महाराष्ट्र)
9730491952 / 9545840063
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वतन-ए-फ़र्ज

🌹वतन-ए-फ़र्ज🌹

साथ हम भी चलें साथ तुम भी चलो,
हिंद के सपूत हो वतन-ए-फ़र्ज निभाते चलो,
कर्ज इस धरा के चुकाने हैं हम सब को आज,
कदम से कदम दिल से दिल मिलाकर चलो.

खिलते रहे गुल-ए-गुलशन में हर पल,
खुशबू हर प्यार की हर एक साँस में भरो,
रहे आब़ाद जश्न और फ़िजा के रंग आज,
हर साँस, नस-नस में विश्वास पिरोते चलो.

चाह दिल में रहे हम सभी जन एक हो,
मिटा न सके कोई हम सभी जान एक हो,
सूरतें चाहे हो हजार-ए-इन्सान आज,
भारत-भारती के दिल की धड़कन बनाते चलो.

मिटे भरम मजहबी सब मजहब एक हो,
'जन-गण-मन' गान हर दिलप्रीत एक हो,
भारत जननी के रखवाले हम सब आज,
निज खून धरा के लिए उर्वरक डालते चलो.

रचनाकार,
मच्छिंद्र भिसे,
भुईंज, सातारा (महाराष्ट्र)
9730491952 / 9545840063
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२६ जनवरी २०१९

नववर्ष के स्वागत में (कविता) - मच्छिंद्र बापू भिसे 'मंजीत'

नववर्ष के स्वागत में

हर साल की तरह,
मुस्कराता रंगीन चेहरा लेकर,
नववर्ष का पहला पन्ना,
फिर से आया है,
मेरे जीवन के,
कितने ही सुनहरे पलों को,
भूतकाल में समेटने, वर्तमान बनकर,
क्या नववर्ष फिर से आया है?

बचपन से आज तक,
नववर्ष के पन्ने बदलता रहा,  
पन्नो के बीच उम्मीदों के,
खोए दिनों को तलाशता रहा,
क्या पाया? क्या खोया?
हिसाब फिर भी न कर पाया मैं,
जायजा लेकर मन को आहत करने,
क्या नववर्ष फिर से आया है?

पन्नों के रंगीन टुकड़े,
टुकड़ों में बिखरते सपनों की,
याद जो दिलाते हैं,
जो कभी पिछले साल देखे थे,
आपाधापी में आगे जो बढ़े हैं,
कैलेंडर के मुखपृष्ठ पर दिखलाते हैं,
उन सपनों को दिखाकर,
क्या नववर्ष मेरा विश्वास तोड़ने आया है ?

ऐ नववर्ष ! कितना भी कर ले हर्ष,
खोई उम्मीद को कभी,
भूतकाल में न खोजा मैंने,
सुनहरे जीवन के सपने और पलों को,
मिटने न दिया मन-मस्तिष्क से मैंने,
पर तू बता हे नववर्ष !
मैं तो वहीँ का वही हूँ,
क्या खुद को मिटाने,
क्या अपनी नाक कटाने फिर से आया है?


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नवकवि
 मच्छिंद्र भिसे (उपशिक्षक)
सदस्य, हिंदी अध्यापक मंडल सातारा
भिरडाचीवाडी, पो.भुईंज, तह.वाई,
जिला-सातारा 415  515  (महाराष्ट्र )
संपर्क सूत्र  ; 9730491952 / 9545840063 

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