मच्छिंद्र बापू भिसे 9730491952 / 9545840063

'छात्र मेरे ईश्वर, ज्ञान मेरी पुष्पमाला, अर्पण हो छात्र के अंतरमन में, यही हो जीवन का खेल निराला'- मच्छिंद्र बापू भिसे,भिरडाचीवाडी, पो. भुईंज, तहसील वाई, जिला सातारा ४१५५१५ : 9730491952 : 9545840063 - "आपका सहृदय स्वागत हैं।"

■ हिंदी हूँ सबकी ■ (कविता)

■ हिंदी हूँ सबकी ■

(कविता)

मैं हिंदी हूँ
मैं भारत हूँ
मैं हिंदी हूँ
सबकी सारथ हूँ।

प्यार हूँ, दुलार हूँ,
संस्कार की धार हूँ
हिंदुस्तान पुकार हूँ।
बोलियों में मँझधार हूँ।

तुलसी की रामायण हूँ,
सूरदास की रसपान हूँ,
कबीरा की बानी हूँ,
मीरा की दीवानी हूँ।

गीता का ज्ञान हूँ,
भारती का संज्ञान हूँ,
कवियों की पुकार हूँ
वीरों की हुँकार हूँ,

गंगा की जलधार हूँ,
बंसी का स्वरनाद हूँ,
कुदरत की मित हूँ
देश का संगीत हूँ।

गाँवों की आवाज़ हूँ,
शहरों की संवाद हूँ,
सपनों की उड़ान हूँ,
देश का विहान हूँ।

एक फूल-सी मुस्कान हूँ
सबकी सायबान हूँ
मैं हिंदी हूँ सबकी जान हूँ
देश का मान-सम्मान हूँ
-०-

14 सितंबर 2025 सुबह: 08.00 बजे
रचनाकार
● मच्छिंद्र बापू भिसे 'मंजीत'● ©®
सातारा (महाराष्ट्र)
सेवार्थ निवास : शिक्षण सेवक, जिला परिषद हिंदी वरिष्ठ प्राथमिक पाठशाला, विचारपुर, जिला गोंदिया (महाराष्ट्र)
9730491952
-०-


4 comments:

  1. Bhut khub Sirji!!

    ReplyDelete
  2. शुन्दर कविता। हार्दिक बधाई

    ReplyDelete
  3. हहिंदी दिवस पर हार्दिक बधाई

    ReplyDelete
  4. हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाए सर 💐

    ReplyDelete

■ चला हो जाऊया शाळेत ■ (मराठी कविता)

■ चला हो जाऊया शाळेत ■ (कविता) चला हो जाऊया शाळेत, शाळेत, आनंद फुलू दे गालात, शाळेची पोरं माझ्या हातात, हातात, नाव कमावतील देशात! अक्षरं काढ...

आपकी भेट संख्या