
■ हिंदी हूँ सबकी ■
(कविता)
मैं हिंदी हूँ
मैं भारत हूँ
मैं हिंदी हूँ
सबकी सारथ हूँ।
प्यार हूँ, दुलार हूँ,
संस्कार की धार हूँ
हिंदुस्तान पुकार हूँ।
बोलियों में मँझधार हूँ।
तुलसी की रामायण हूँ,
सूरदास की रसपान हूँ,
कबीरा की बानी हूँ,
मीरा की दीवानी हूँ।
गीता का ज्ञान हूँ,
भारती का संज्ञान हूँ,
कवियों की पुकार हूँ
वीरों की हुँकार हूँ,
गंगा की जलधार हूँ,
बंसी का स्वरनाद हूँ,
कुदरत की मित हूँ
देश का संगीत हूँ।
गाँवों की आवाज़ हूँ,
शहरों की संवाद हूँ,
सपनों की उड़ान हूँ,
देश का विहान हूँ।
एक फूल-सी मुस्कान हूँ
सबकी सायबान हूँ
मैं हिंदी हूँ सबकी जान हूँ
देश का मान-सम्मान हूँ
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14 सितंबर 2025 सुबह: 08.00 बजे
रचनाकार
● मच्छिंद्र बापू भिसे 'मंजीत'● ©®
सातारा (महाराष्ट्र)
सेवार्थ निवास : शिक्षण सेवक, जिला परिषद हिंदी वरिष्ठ प्राथमिक पाठशाला, विचारपुर, जिला गोंदिया (महाराष्ट्र)
9730491952
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