मच्छिंद्र बापू भिसे 9730491952 / 9545840063

'छात्र मेरे ईश्वर, ज्ञान मेरी पुष्पमाला, अर्पण हो छात्र के अंतरमन में, यही हो जीवन का खेल निराला'- मच्छिंद्र बापू भिसे,भिरडाचीवाडी, पो. भुईंज, तहसील वाई, जिला सातारा ४१५५१५ : 9730491952 : 9545840063 - "आपका सहृदय स्वागत हैं।"

चलना सीखें (कविता)

चलना सीखें
(कविता)
पाँव छलनी हो जाए जितने
चलते-चलते काँटों पर
रूकने का पर नाम न लेंगे
आखिरी साँस निकलने पर!

होगा तय गंतव्य कभी
एक आस लिए चलते हैं
आएगा कोई साथ हमारे
बिन चाह दर से निकलते हैं
पग न डगमग हो जाए कभी
लाख आँधी-बवंडर आने पर!

चलने की बस चाह लिए
मिटने की चाल चलते हैं
कर्मयोगी-सा नित डटने को
तरू स्थितप्रज्ञ-सा खिलते हैं
तन चल और मन हो न विचल
घाम, शीत, मेह बरसने पर!

काँटो पर ही चलना सीखें
नई भोर निकलकर आएगी
मंजील 'मंजीते' दूर ही सही
चलने की प्रीत सबको भाएगी
चलना ही बस चलना होगा
सौ बार और हर बार गीरने पर!
-०-
● मच्छिंद्र बापू भिसे 'मंजीत'●
सातारा (महाराष्ट्र)
संपादक
सृजन महोत्सव पत्रिका
मोबाइल: 9730491952
ईमेल: machhindra.3585@gmail.com
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