
मंगल 'वाणी'
विधा: हाइकु
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मन चंदन
शत वाणी नमन
होऊँ पावन।
(सरस्वती स्वरूप वाणी)
------------🙏----------
सगुण वाणी
जगत को समेटे
धरा को पानी।
(मधुर वाणी)
------------🙏----------
लगे अंकुश
बेचाल वाणी पर
रहेंगे खुश।
(चंचल वाणी)
------------🙏----------
गुरु की वाणी
अमृत-सी सुहाए
भाग जगाए।
(ज्ञान वाणी)
------------🙏----------
वाणी प्रकोप
जीवन भार बने
जीवन भुने।
(क्रोधिष्ठ वाणी)
------------🙏----------
दीजिए वाणी
मर मिटे निभाने
विश्वास पाने।
(वचन वाणी)
------------🙏----------
वाणी को आँके
कहा सिर्फ न माने
आँख से देखे।
(भ्रमोत्पादक वाणी)
------------🙏----------
मंगल वाणी
दादी के मुख सुने
कही कहानी।
(अनुभव वाणी)
------------🙏----------
वाणी अपनी
नित अमृत घोलें
लगे सुहानी।
(मोहक वाणी)
------------🙏----------
फिसले वाणी
वापस न आएगी
पीर लाएगी।
(असंयमी वाणी)
------------🙏----------
9 अगस्त 2020
मच्छिंद्र भिसे ©®
सातारा (महाराष्ट्र)
9730491952
-0-
🌹🌻
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मन चंदन
शत वाणी नमन
होऊँ पावन।
(सरस्वती स्वरूप वाणी)
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सगुण वाणी
जगत को समेटे
धरा को पानी।
(मधुर वाणी)
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लगे अंकुश
बेचाल वाणी पर
रहेंगे खुश।
(चंचल वाणी)
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गुरु की वाणी
अमृत-सी सुहाए
भाग जगाए।
(ज्ञान वाणी)
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वाणी प्रकोप
जीवन भार बने
जीवन भुने।
(क्रोधिष्ठ वाणी)
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दीजिए वाणी
मर मिटे निभाने
विश्वास पाने।
(वचन वाणी)
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वाणी को आँके
कहा सिर्फ न माने
आँख से देखे।
(भ्रमोत्पादक वाणी)
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मंगल वाणी
दादी के मुख सुने
कही कहानी।
(अनुभव वाणी)
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वाणी अपनी
नित अमृत घोलें
लगे सुहानी।
(मोहक वाणी)
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फिसले वाणी
वापस न आएगी
पीर लाएगी।
(असंयमी वाणी)
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9 अगस्त 2020
मच्छिंद्र भिसे ©®
सातारा (महाराष्ट्र)
9730491952
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