
'सोच-विचार'
विधा: हाइकु
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सोच के सोच
मैंने सही-गलत
पाई है सोच।
(सोच का स्वरूप)
------------🙏----------
सोच अभ्यासी
ज्ञानवृद्धि को पाए
समृद्धि लाए।
(सोच का फल)
------------🙏----------
पाने को प्यार
सही सोच अपना
ना न कहना।
(सोच का प्रभाव)
------------🙏----------
पीर में सोच
सारगर्भित रखे
जग भी देखे।
(चिंतनीय सोच)
------------🙏----------
सार्थक सोच
लक्ष्य पाने सोचिए
हो नि:संकोच।
(सार्थ सोच)
------------🙏----------
आगे क्या होगा?
भूल जाए वो सोच
होगा सो होगा।
(चिंतार्थ सोच)
------------🙏----------
ईश की देन
मनुज पाई सोच
मत दबोच।
(सोच की मुखरता)
------------🙏----------
भूल अपनी
जब सोच स्वीकारे
आनंद भरें ।
(पश्चाताप की सोच)
------------🙏----------
सोच विचार
कर ले व्यवहार
लाने बाहर।
(सोच की व्यवहारिकता)
------------🙏----------
10 अगस्त 2020
मच्छिंद्र भिसे ©®
सातारा (महाराष्ट्र)
9730491952
-0-

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सोच के सोच
मैंने सही-गलत
पाई है सोच।
(सोच का स्वरूप)
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सोच अभ्यासी
ज्ञानवृद्धि को पाए
समृद्धि लाए।
(सोच का फल)
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पाने को प्यार
सही सोच अपना
ना न कहना।
(सोच का प्रभाव)
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पीर में सोच
सारगर्भित रखे
जग भी देखे।
(चिंतनीय सोच)
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सार्थक सोच
लक्ष्य पाने सोचिए
हो नि:संकोच।
(सार्थ सोच)
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आगे क्या होगा?
भूल जाए वो सोच
होगा सो होगा।
(चिंतार्थ सोच)
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ईश की देन
मनुज पाई सोच
मत दबोच।
(सोच की मुखरता)
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भूल अपनी
जब सोच स्वीकारे
आनंद भरें ।
(पश्चाताप की सोच)
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सोच विचार
कर ले व्यवहार
लाने बाहर।
(सोच की व्यवहारिकता)
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10 अगस्त 2020
मच्छिंद्र भिसे ©®
सातारा (महाराष्ट्र)
9730491952
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