
क्या लेकर
(गीत)जिंदगी में क्या लेकर
आया रे इन्सान,
खाली हाथ आया था
खाली जाएगी जान!
माँ-बाप प्यार मिला
जीवन बनी बहार
यार-संगी बहुत मिले
बरस रहे हैं प्यार,
दामन अपना प्यार से भर ले
पाए जा सम्मान!
झूठ, फरेब के संग से
जीवन स्वाह न कर
अब भी देर कहाँ हुई
सच की राह तू धर
स्वर्ग जीवन में उतरेगा
ना बन रे नादान!
जीवन स्वाह न कर
अब भी देर कहाँ हुई
सच की राह तू धर
स्वर्ग जीवन में उतरेगा
ना बन रे नादान!
पढ़-लिखकर बड़ा बना
बढ़ता गया अभिमान
धन-दौलत जोड़ गया
माया बन गई शान,
बेमतलब की शान से
कर्पूर-सा रे वितान!
बढ़ता गया अभिमान
धन-दौलत जोड़ गया
माया बन गई शान,
बेमतलब की शान से
कर्पूर-सा रे वितान!
सबको अपना कहता है
कौन आए है काम ?
वे नहीं तो तू ही सही
भर ले उनके जाम,
‘मंजीत’ राहें चल रे बंदे
सबको कर लें प्रणाम!
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कौन आए है काम ?
वे नहीं तो तू ही सही
भर ले उनके जाम,
‘मंजीत’ राहें चल रे बंदे
सबको कर लें प्रणाम!
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०२ जून २०२१
मच्छिंद्र बापू भिसे 'मंजीत' ©®
(अध्यापक-कवि-संपादक)
सातारा (महाराष्ट्र) पिन- 415 515
मोबाइल: 9730491952
ईमेल: machhindra.3585@gmail.com
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