
'व्यर्थ स्वर्ग'
(सजल/ग़ज़ल)
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23 अगस्त 2020
मच्छिंद्र भिसे ©®
सातारा (महाराष्ट्र)
9730491952
(अध्यापक-कवि-संपादक)
पता: भिरडाचीवाडी (भुईंज), तह. वाई, जिला सातारा (महाराष्ट्र) 415515
ईमेल: machhindra.3585@gmail.com
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फरेबी, तू मेरा कुछ बिगाड़ नहीं सकता,
पानी की धार हूँ मैं मुझको रोक नहीं सकता।
हर शक्ल की यहाँ कई सूरतें है,
मेरी छवि सूरज है चाहकर भी ढक नहीं सकता।
शौक से जिए यह दुनिया तुम्हारी है,
ग़म दीजिए साहब! सुख का दान ले नहीं सकता।
मंजिलें राह काँटे अक्सर यहाँ चुभते हैं
डरकर भूल से फूल की चाह कर नहीं सकता।
मुस्कुराहट लिए यहाँ हर चेहरा बोलता है,
आग सीने में है किसी को दिखा नहीं सकता।
जन्म और मृत्यु भी कितने बेगाने हैं,
जैसे तुम और मैं इनसे बेवफाई कर नहीं सकता।
सुन बात 'मछिंदर' यह सब पराया है,
बाँट दे सबकुछ यहाँ व्यर्थ स्वर्ग जा नहीं सकता।
-०-
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पानी की धार हूँ मैं मुझको रोक नहीं सकता।
हर शक्ल की यहाँ कई सूरतें है,
मेरी छवि सूरज है चाहकर भी ढक नहीं सकता।
शौक से जिए यह दुनिया तुम्हारी है,
ग़म दीजिए साहब! सुख का दान ले नहीं सकता।
मंजिलें राह काँटे अक्सर यहाँ चुभते हैं
डरकर भूल से फूल की चाह कर नहीं सकता।
मुस्कुराहट लिए यहाँ हर चेहरा बोलता है,
आग सीने में है किसी को दिखा नहीं सकता।
जन्म और मृत्यु भी कितने बेगाने हैं,
जैसे तुम और मैं इनसे बेवफाई कर नहीं सकता।
सुन बात 'मछिंदर' यह सब पराया है,
बाँट दे सबकुछ यहाँ व्यर्थ स्वर्ग जा नहीं सकता।
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मच्छिंद्र भिसे ©®
सातारा (महाराष्ट्र)
9730491952
(अध्यापक-कवि-संपादक)
पता: भिरडाचीवाडी (भुईंज), तह. वाई, जिला सातारा (महाराष्ट्र) 415515
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