
■ हौसले फौलादी ■
(कविता)
जीत जाए तन के विकार
हर जाए मन संकोच विचार,
हो हर पथ हौसले फौलादी
रिपु जो करे सौ-सौ प्रहार!
अनंत अभिलाषाएँ लेकर चलें
तूफानी धूल चाहे दो हाथ मिलें
चाहे राह पर हार-पुष्प खिलें,
करते रहे नेक शर बौछार!
अनंत भुवन तुम्हारा होगा
जब जितने का जज्बा होगा
तू और तू ही को चलना होगा,
न लगा किसी से आस-गुहार!
चाहे पद डग मग हो जाए
चाहे हाथ अनंग हो जाए
चाहे आँख दीपदान हो जाए,
अस्ति साँसें भी लाए लौ बहार!
तम के बिन क्या उजियाला
गम के बिन सुख भी अकेला
लगेगा तुम बिन संसार का मेला,
बस तू जी ले चैन के दिन चहार!
-०-
07 अक्बतूर 2022
रचनाकार: मच्छिंद्र बापू भिसे 'मंजीत' ©®
संपादक : सृजन महोत्सव पत्रिका, सातारा (महाराष्ट्र)


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