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विधा: हाइकु
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सत के पंथी
राह जो जहाँ चलें
पथ न भूलें।
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सत ना मरे
लाख चाहे असत
कोशिश करे।
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मिलेगा ठाँव
रहे सवार नित
सत की नाव।
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सत सद्गुरू
शरण जो भी जाए
मुक्ति वे पाए।
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सत ही सत
जीवन अपनाया
सत को पाया।
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6 अगस्त 2020
*मच्छिंद्र भिसे*©®
सातारा (महाराष्ट्र)
🌹🌻
मच्छिंद्र बापू भिसे 9730491952 / 9545840063
सत की नाव (हाइकु)
🌞 *सत की नाव* 🌝
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